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मनरेगा नाम विवाद पर शिमला में उपवास: सीएम सुक्खू सहित कैबिनेट ने जताया विरोध

➤ मनरेगा से ‘महात्मा गांधी’ नाम हटाने के विरोध में रिज पर दो घंटे उपवास
➤ सीएम सुक्खू बोले – योजना की आत्मा और पंचायतों की भूमिका कमजोर की गई
➤ कांग्रेस ने चेताया – पुराने स्वरूप की बहाली नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज


शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल समेत कई मंत्री और कांग्रेस नेता उपवास पर बैठे। यह विरोध मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और योजना के स्वरूप में बदलाव के खिलाफ दर्ज कराया गया।

CM सुक्खू, प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल व अन्य रिज पर उपवास पर बैठे।

सीएम सुक्खू ने कहा कि मनरेगा के जरिए पंचायतें कच्ची सड़कों व रास्तों जैसे कामों की योजनाएं बनाकर गांव में रोजगार सृजित करती थीं, लेकिन अब पंचायत प्रधान और सचिव के हाथ से योजना बनाने की शक्तियां कम कर दी गई हैं। उनके अनुसार, योजना का नाम बदलने के साथ उसकी मूल भावना भी प्रभावित हुई है।

मनरेगा योजना से गांधी का नाम हटाने के विरोध में उपवास पर बैठे कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने गरीबों से उनके रोजगार का अधिकार छीना है, इसलिए देशभर में कांग्रेस इस मुद्दे पर विरोध दर्ज करा रही है।

सीएम सुक्खू समेत दूसरे नेता रिज पर उपवास पर बैठे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों को साल में 100 दिन रोजगार देने की गारंटी के लिए जानी जाती थी। उनके मुताबिक, योजना के स्वरूप में बदलाव PMO के दबाव में किया गया और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि योजना के पुराने स्वरूप को बहाल नहीं किया गया तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि योजना में बदलाव से महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को मिलने वाले रोजगार पर असर पड़ेगा और पंचायतों की भागीदारी सीमित हो जाएगी।